भारत के 71 वें स्वतंत्रता दिवस पर दो शब्द स्वतंत्रता का सम्मान और उसकी हिफाजत सवतंत्रता के बोध से पैदा होती है | हम कामना करते हैं कि लोगों के अंदर यह बोध इस दिवस पर पैदा हो | विदेशी ताकतें हमेशा स्वतंत्रता के बोध को समाप्त करने के लिए भ्रमित (confuse) करने, गलत परिभाषित और गलत विश्लेषण करने की नौकरी कुछ लोगों को देती रही हैं | इस मुल्क में जिनको स्वतंत्रता चाहिए उन्होंने ले ली और जो लोग यह मान बैठे कि वे महापुरुषों के वंशज हैं इसलिए उन्हें कुछ करने की जरूरत नहीं वे व्यवस्था में हर जगह से बेदखल होते जा रहे हैं और गुलाम होते जा रहे | स्वतंत्रता किससे चाहिए और किसलिए चाहिए ? जिससे स्वतंत्रता चाहिए वह क्या है: व्यक्ति या व्यवस्था ? वह कौन सा काम है जिसको हम स्वतंत्रता पूर्वक करना चाहते हैं ? कौन सी गुलामी ज्यादा खतरनाक है: मानसिक या भौतिक (शारीरिक) ? एक उदहारण से बात समझ में आ जाये | कार की फैक्ट्री में कार ही बनती है और घड़ी की फैक्ट्री में घड़ी बनती है | फैक्ट्री एक व्यवस्था है; जैसा परिणाम चाहिए उसके हिसाब से व्यवस्था बनानी पड़ती है | इसलिए आपेक्षित परिणाम के आधार पर बनायीं गयी ...
महेश कुमार छोंकर 7015401075